Saturday, March 12, 2011

मनुज देवता बने, बने यह धरती स्वर्ग समान

देवियोँ! भाइयों!!
देवताओं के अनुग्रह की बात आपने सुनी होगी। देवता नाम ही इसलिए रखा गया
है क्योंकि वे दिया करते हैं। प्राप्त करने की इच्छा से कितने ही लोग
उनकी पूजा करते हैं, उपासना करते हैं भजन करते हैं, आइए- इस पर विचार
करते हैं।
देवता देते तो हैं, इसमें कोई शक नहीं है। अगर वे देते न होते तो उनका
नाम देवता न रखा गया होता। देवता का अर्थ ही होता है- देने वाला। देने
वाले से माँगने वाला कुछ माँगता है तो कुछ गलत बात नहीं है। पर विचार
करना पड़ेगा कि, आखिर देवता देते क्या हैं? देवता वही चीज देते हैं जो
उनके पास है। जो जिसके पास जो चीज होगी, वही तो दे पाएगा! देवताओं के पास
और चाहे जो हो पर एक चीज अवश्य है- देवत्व। देवत्व कहते हैं- गुण, कर्म
और स्वभाव तीनों की श्रेष्ठता को। इतना देने के बाद देवता निश्चिँत हो
जाते हैं, निवृत्त हो जाते हैं और कहते हैं कि हम जो दे सकते थे वह दिया।
अब आपका काम है कि, जो चीज हमने आपको दी है, उसको आप जहाँ भी मुनासिब
समझें, इस्तेमाल करें और उसी किस्म की सफलता पाएँ।

दुनिया में सफलता एक चीज के बदले में मिलती है- उत्कृष्ट व्यक्तित्व के
बदले। इससे कम में कोई चीज नहीं मिल सकती। अगर कहीं से किसी ने घटिया
व्यक्तित्व की कीमत पर किसी तरीके से अपने सिक्के को भुनाए बिना, अपनी
योग्यता का सबूत दिए बिना, परिश्रम के बिना, गुणों के बिना, कोई चीज
प्राप्त कर ली है तो वह उसके पास ठहरेगी नहीं। शरीर में हज़म करने की ताकत
न हो तो जो खुराक आपने ली है, वह आपको हैरान करेगी, परेशान करेगी। इसी
तरह संपत्तियोँ को, सुविधाओं को हज़म करने के लिए गुणों का माद्दा नहीं
होगा तो वे आपको तंग करेंगी, परेशान करेंगी। अगर गुण नहीं हैं तो जैसे
जैसे दौलत बढ़ती जाएगी वैसे वैसे आपके अंदर दोष- दुर्गुण बढ़ते जाएँगे,
अहंकार बढ़ता जाएगा और आपकी जिंदगी को तबाह कर देगा।

देवता क्या देते हैं? देवता हज़म करने की ताकत देते हैं। जो दुनियाबी दौलत
या जिन चीजों को आप माँगते हैं, जो आपको खुशी का बायस मालूम पड़ती हैं, उन
सारी चीजों का लाभ लेने के लिए विशेषता होनी चाहिए। इसी का नाम है-
देवत्व। देवत्व यदि प्राप्त हो जाता है तो आप दुनिया की हर चीज से, छोटी
से छोटी चीज से फायदा उठा सकते हैं। ज्यादा चीजें हो जाएँ तो भी अच्छा
है, यदि न हो पाएँ तो भी कोई हर्ज नहीं। मनुष्य के शरीर में ताकत होनी
चाहिए लेकिन समझदारी का नियंत्रण न होने से आग में घी डालने के तरीके से
वह सिर्फ दुनिया में मुसीबतेँ पैदा करेगी। इंसानियत उस चीज का नाम है;
जिसमें आदमी का चिंतन, दृष्टिकोण, महत्वाकांक्षाएँ और गतिविधियाँ ऊँचे
स्तर की हो जाती हैं। इंसानियत एक बड़ी चीज है।

मनोकामनाएँ पूरी करना बुरी बात नहीं है, पर शर्त एक ही है कि किस काम के
लिए, किस उद्देश्य के लिए माँगी गई हैं? यदि सांसारिकता के लिए माँगी गई
हैं तो उससे पहले यह जानना जरूरी है कि उस दौलत को हज़म कैसे करेंगे? उसे
खर्च कैसे करेंगे? देवताओं के संपर्क में आने पर हमें सद्गुण मिलते हैं,
देवत्व मिलता है। सद्गुणोँ से व्यक्ति को विकास करने का अवसर मिलता है।
गुणों के विकसित होने के बाद मनुष्यों ने वह काम किए हैं जिन्हें सामान्य
बुद्धि से वह नहीं कर सकते थे। देवत्व के विकसित होने पर कोई भी उन्नति
के शिखर पर जा पहुँच सकता है, चाहे वह सांसारिक हो या आध्यात्मिक। संसार
और अध्यात्म में कोई फर्क नहीं पड़ता। गुणों के इस्तेमाल करने का तरीका भर
है। गुण अपने आप में शक्ति पुंज हैं, कर्म अपने आप में शक्ति पुंज हैं,
स्वभाव अपने आप में शक्ति पुंज हैं। इन्हें कहाँ इस्तेमाल करना है, यह आप
पर निर्भर है।
क्रमशः ...

2 comments:

  1. सार्थक पोस्ट। बहुत सुन्दर। होली की सपरिवार हार्दिक शुभकामनायें।

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  2. एसा होना नामुनकिन है ! अच्छी कोसिस!होली की ढेरों शुभकामनाएं! हवे अ गुड डे ! मेरे ब्लॉग पर आये !
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