Friday, February 25, 2011

चोरी या सीनाजोरी

जी हाँ बिल्कुल ठीक पढ़ रहे हैं आप। मुझे नहीं मालूम यह पूरे देश में हो रहा है या नहीं पर उत्तर प्रदेश एवं बिहार में यही स्थिति है।
यहाँ सरकारी वाहनों एवं सरकारी काम पर लगे निजी वाहनों से ईंधन (डीजल या पेट्रोल) की चोरी सरेआम हो रही है। यह चोरी मुख्य रूप से ऑटो चालकों को या निजी वाहनों में प्रयोग के लिए बेचने के लिए की जा रही है। चोरी करने के लिए ग्राहक डब्बा ले कर पहले से नियत स्थान पर मौजूद रहता है जिसे फ्यूल पंप से कम कीमत पर तेल बेचा जाता है।
तेल बेचने का काम सुबह कार्यालय खुलने से पहले या शाम को कार्यालय बंद होने के बाद या कभी कभी मौका मिलने पर बीच में भी होता है।
वाहन चालक तेल बेचने के बाद ट्रिपमीटर/ मीटर रीडर को आवश्यकतानुसार सेट करता है।
इन चोरोँ का आत्मविश्वास इतना अधिक होता है कि ये लोगों के सामने ही तेल निकालते और बेचते हैं।
अजी और भी नमूने हैं-
यहाँ पर लोगों को अपने दोपहिया वाहनों पर नियमानुसार रजिस्ट्रेशन क्रमांक लिखने में अपनी मानहानि महसूस होती है तभी तो लगभग नब्बे प्रतिशत दोपहिया वाहनों के सिर्फ पिछले नंबर प्लेट पर ही नंबर लिखे दिखाई देते हैं जबकि नियमानुसार गाड़ी के दोनों तरफ नंबर लिखा होना चाहिए। हद तो यह है कि पुलिस वालों की गाड़ियों पर भी नंबर नहीं लिखे होते। वे दूसरों को क्या नियम बताएँगे?
और देखिए..
आप देश के किसी भी भाग से रेलगाड़ी से यात्रा करते हुए उत्तर प्रदेश या बिहार आइए। यदि आप राजधानी एक्सप्रेस या ऐसी दूसरी गाड़ी में सफर नहीं कर रहे हैं तो आपकी गाड़ी पूरी यात्रा के दौरान जितने पड़ाव लेगी उसके आधे से ज्यादा उत्तर प्रदेश और बिहार में चलने के दौरान लेगी। आप सोच रहे होंगे कि इन दो राज्यों में चलने के दौरान दूरी ज्यादा होती होगी। जी नहीं, ऐसा नहीं है। यहाँ एक ओर तो रेलवे की ढीली व्यवस्था के कारण कोई नहीं जानता कि गाड़ी कब कहाँ कितने समय के लिए खड़ी हो जाएगी, दूसरी ओर कुछ लोगों को गाड़ी से ठीक अपने घर के सामने उतरने की आदत है। इसलिए वे अपने घरों के सामने गाड़ी खड़ी करते हैं और ऐसा अनेकोँ बार नहीं अनगिनत बार भी हो सकता है। रेलगाड़ी खड़ी करने के लिए वे क्या करते हैं यह तो वे लोग जानें या रेलवे के लोग पर आम लोग इसे चेन खींचना कहते हैं। जहाँ तक सुरक्षा कर्मियों की बात है वे या तो सोते रहते हैं या ताश खेलते हैं या अपनी वसूली (जी हाँ) करते रहते हैं।
और? अरे बस भी! फिर अगली बार।
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