Thursday, November 10, 2011

उद्देश्य ऊँचा रखें

मिट्टी के खिलौने जितनी आसानी से मिल जाते हैं, उतनी आसानी से सोना नहीं
मिलता। इसी तरह पापोँ की ओर आसानी से मन चला जाता है, किंतु पुण्य कर्मों
की ओर मन को प्रवृत्त करने में काफी परिश्रम करना पड़ता है। पानी की धारा
नीचे पथ पर कितनी तेजी से अग्रसर होती है, किंतु यदि पानी ऊँचे स्थान पर
चढ़ाना हो तो, कुछ विशेष व्यवस्था करनी पड़ती है।
बुरे विचार, तामसी संकल्प बड़ा मनोरंजन करते हुए मन में घर बना लेते हैं
और साथ ही अपनी मारक शक्ति को भी ले आते हैं। स्वार्थपूर्ण नीच भावनाओं
का वैज्ञानिक विश्लेषण कर के पता चला है कि वे काले रंग की छुरियोँ के
समान तीक्ष्ण एवं तेजाब की तरह दाहक होती हैं।
विचारों में भी पृथ्वी आदि तत्वों की भाँति खींचने और खिँचने की विशेषता
होती है। स्थान मिलने पर अपनी भावना को पुष्ट करने वाले एक ही जाति के
विचार उड़ उड़ कर एकत्रित होने लगते हैं। यह तथ्य बुरे, तामसी विचार और भले
विचार सभी के संबंध में सत्य है।
जिन्होंने बहुत समय तक बुरे, तामसी और स्वार्थपूर्ण विचारों को अपने मन
में स्थान दिया है, उनके लिए इन विचारों को बाहर निकालना बहुत कठिन होता
है और ऐसे लोगों को चिंता, भय और निराशा जैसी परेशानियों का शिकार होना
ही पड़ेगा।
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