बिहार में रेहाना की बर्खास्तगी का मामला उम्मीद के अनुसार ही एक विवाद का स्वरूप
लेता जा रहा है। ये विवाद हमारे चुने हुए प्रतिनिधियों की कुंठित मानसिक
स्थिति को इंगित करते हैं। देश हित में बनाए गए एक सर्वथा आवश्यक कानून
को जन विरोधी बता कर अपनी गलतियों को अपने फायदे के लिए सही साबित करना
अब इन राजनीतिक लोगों का हथकंडा बन चुका है। अतः इसमें जुटे लोगों में
क्षेत्रीय राजनीतिक लोगों को देखकर आश्चर्य नहीं होना चाहिए। रेहाना जैसे
लोगों के साथ इनको साथ देने वाले लोगों को भी जनहित व देशहित विरोधी
भावनाएँ भड़काने के आरोप में सरकारी दायित्वों से मुक्त कर देना चाहिए और
भविष्य में भी चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए। यदि ऐसा कानून
नहीं है तो उसे बनाया जाना चाहिए। इस मुद्दे को धर्म से जोड़कर बच्चों को
भगवान का आशीर्वाद या अल्लाह की नेमत बताने वाले लोग ऐसे हजारों बच्चों की
सुध क्यों नहीं लेते जो अपने माँ बाप की गलतियों से सड़कों, रेलवे
स्टेशनों और ऐसे अन्य जगहों पर भीख माँगते हैं, उन बच्चों की सुध क्यों
नहीं लेते जो अपना बचपन भी पूरा नहीं कर पाते। क्या अल्लाह के नेमत की
उनके लिए इतनी ही कीमत है? इंसान की गलतियों को भगवान या अल्लाह पर थोपना
उचित नहीं है। ईश्वर ने इंसान को बुद्धि दी है ताकि वो अपना फायदा नुकसान
समझ सके और अपने कर्मों के लिए इंसान खुद ही जिम्मेदार है ईश्वर या
अल्लाह नहीं। आज परिवार नियोजन के कई साधन उपलब्ध हैं। इनमें से जो अपने
और अपने धर्म की मान्यताओं के अनुकूल लगे उन्हें उपयोग करना चाहिए और यदि
ऐसा नहीं करना है तो खुद पर संयम रखना सीखना चाहिए। अपनी जरूरतों को पूरा
करते हुए देश एवं समाज का ध्यान रखना भी जरूरी है। जो मान्यताएँ समय के
हिसाब से बदलती नहीं हैं वे बिखर जाती हैं और अपने मानने वाले को भी
तकलीफ पहुँचाती हैं। आज के समय में हमारे देश में आबादी का विकराल स्वरूप
हमारे विकास में सबसे बड़ा रोड़ा है। इसे नियंत्रित करने का एकमात्र कारगर
तरीका परिवार नियोजन है और हमें इस तथ्य को समझना ही होगा। इसे बढ़ावा
देने के लिए कड़े कानून भी होने ही चाहिए और इसमें किसी धर्म या मान्यता
का कोई सरोकार नहीं है। रेहाना को अपने निजी फायदे से ऊपर उठकर कार्य
करना
चाहिए। उसे अपनी गलतियों को समझते हुए अन्य लोगों को भी परिवार नियोजन के
लिए प्रेरित करना चाहिए। इससे देश के साथ मुस्लिम समाज में भी एक
सकारात्मक मिसाल बनेगी। यदि वह सच में समाज सेवा करने को उत्सुक हैं तो
उन्हें ऐसा करना ही होगा, आगे उनकी मर्जी।
एक युवा जिसके कुछ सपने हैं, कुछ विशिष्ट विचार एवं संकल्पनाएँ हैं, जिसकी कुछ प्रतिमाएँ अभी सामने आनी बाकी हैं और जिसकी चाहत है अपने चारों ओर एक सकारात्मक बदलाव लाने की। यह मेरी डिजिटल डायरी है जिसे आप भी पढ़ सकते हैं। वैसी बातें जिन्हें मैं सबको बताना चाहूँ या जिन्हें व्यक्त करने के लिए एक अदद मित्र की जरूरत पड़े दोनों ही इसमें मिल जाएँगी। हो सकता है इसके कुछ पोस्ट से आप सहमत न हों लेकिन यह मेरे पोस्ट के समय विशेष पर मेरी विचारधारा को इंगित करता है और आप इसे इसी नजरिये से लें। धन्यवाद।
Thursday, July 28, 2011
Monday, July 18, 2011
भ्रष्टाचार की जड़ें- 1- 1
पटना जैसे शहरों में बिजली की चोरी जोरों से चल रही है। लोग अपने घरों में बाकायदा चेँजओवर स्विच लगाए हुए हैं जिनसे वे रात में, मोटर वगैरह चलाते समय या फिर महीने में कुछ दिनों के लिए बिजली के मीटर को बायपास कर अपनी मर्जी के बिजली बिल में मनमानी बिजली उपयोग करते हैं। हद यह है ज्यादातर लोगों ने किराएदार रखे हैं जिनके लिए सब-मीटर लगे हैं और किराएदारोँ से बिजली बिल के नाम पर मोटी रकम भी वसूली जा रही है, अर्थात दोनों तरफ से फायदा। किराएदारोँ की कोई पक्की जानकारी नहीं ली जाती है न ही पुलिस में उनके बारे में कोई जानकारी दी जाती है जिससे शहरों में आपराधिक घटनाओं पर रोक लगा पाना असंभव होता जा रहा है। एक और बात- किराएदारोँ से मिलने वाली रकम के एवज में कोई रसीद नहीं दी जाती, माँगने पर भी नहीं- रहना है तो रहो नहीं तो कहीं और देखो! नौकरीपेशा किराएदार तो नकली रसीद जमा कर के अपने लिए टैक्स की छूट प्राप्त कर लेते हैं जबकि मकान मालिक भी अपनी आय को छिपा कर सरकारी खजाने को दोगुना चुना लगाते हैं।
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